Sumendra Sushant Bohra Uncategorized एक अप्रैल से बिजली और पानी के बिलों में बढ़ोतरी—यह आम जनता पर सीधा आर्थिक हमला है।

एक अप्रैल से बिजली और पानी के बिलों में बढ़ोतरी—यह आम जनता पर सीधा आर्थिक हमला है।

एक अप्रैल से बिजली और पानी के बिलों में बढ़ोतरी—यह आम जनता पर सीधा आर्थिक हमला है। post thumbnail image

खबरों के अनुसार 10–15% तक की वृद्धि की बात सामने आ रही है, ऐसे समय में जब महंगाई पहले ही चरम पर है। रसोई गैस ₹1000 के आसपास, पेट्रोल ₹90+ और रोजमर्रा की जरूरतों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं।

ऐसे में किसान, मजदूर और मध्यम वर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त बोझ डालना क्या न्यायसंगत है?

जब प्रदेश में अभी भी कई जगहों पर बिजली कटौती, लो-वोल्टेज की समस्या और पानी की अनियमित सप्लाई बनी हुई है, तो बिना सेवाएं सुधारे दरें बढ़ाना आखिर किस बात का संकेत है?
सवाल साफ है—

क्या सरकार अपनी विफलताओं का बोझ जनता पर डाल रही है?

क्या आम आदमी की परेशानियां अब सरकार की प्राथमिकता नहीं रहीं?

यह फैसला सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि जनविरोधी है—और जनता इसका जवाब जरूर देगी।

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