मालसी (देहरादून) क्षेत्र में युवाओं और खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रयासों में सुमेन्द्र सुशांत बोहरा का नाम तेजी से उभर रहा है। एक युवा जनप्रतिनिधि और सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में वे लगातार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि स्पोर्ट्स सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व निर्माण का आधार है।
उनकी पहलें खेल सुविधाओं के विकास, युवा खिलाड़ियों को प्रोत्साहन और स्थानीय स्तर पर खेल आयोजनों को बढ़ावा देने के इर्द-गिर्द घूमती हैं।
सुमेन्द्र सुषांत बोहरा के कार्य और पहल
🌟 परिचय: युवाओं से जुड़े रहने वाला नेतृत्व
सुमेन्द्र सुषांत बोहरा, मालसी देहरादून के सक्रिय पार्षद हैं, और युवा नेतृत्व का एक प्रखर उदाहरण माने जाते हैं।
उनकी पहचान इन विशेषताओं से बनती है:
- युवाओं से सीधा संवाद
- समस्याओं को नज़दीक से समझने की शैली
- खेल, शिक्षा और स्थानीय विकास के प्रति स्पष्ट रुचि
- समाजसेवा को प्राथमिकता देने वाली सोच
उनका मानना है कि जब तक युवा मज़बूत नहीं होंगे, तब तक समाज मज़बूत नहीं हो सकता।
🏏 1. स्थानीय खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन
सुमेन्द्र सुषांत बोहरा अक्सर स्कूल व स्थानीय क्लब स्तर पर खेल गतिविधियों में भाग लेते हैं और उभरते हुए खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
उनकी प्राथमिकताएँ:
- बच्चों के लिए शुरुआती स्तर पर खेल प्रशिक्षण
- खेल-सामग्री की उपलब्धता
- खेल मैदानों की नियमित देखरेख
- स्थानीय टूर्नामेंटों में सहयोग
यह समर्थन उन परिवारों के लिए बेहद उपयोगी साबित होता है जिनके बच्चे खेलों में अच्छा कर सकते हैं लेकिन संसाधनों की कमी बाधा बन जाती है।
युवा खेल समर्थन और स्थानीय गतिविधियाँ
🏅 2. खेल आयोजनों को बढ़ावा
मालसी और आसपास के क्षेत्रों में आयोजित होने वाले:
- क्रिकेट टूर्नामेंट
- फुटबॉल प्रतियोगिताएँ
- वॉलीबॉल व बैडमिंटन लीग
- बच्चों के वार्षिक स्पोर्ट्स डे
जैसे कार्यक्रमों में सुमेन्द्र बोहरा की उपस्थिति और योगदान यह दर्शाता है कि वे खेलों को सामाजिक एकता और सकारात्मक ऊर्जा का माध्यम मानते हैं।
🏟 3. खेल सुविधाओं का विकास
एक स्थानीय जनप्रतिनिधि के रूप में उनकी भूमिका सिर्फ आयोजनों तक सीमित नहीं है।
उन्होंने कई बार:
- मैदानों के सुधार
- स्पोर्ट्स एरियाज़ में सफाई एवं सुरक्षा
- नई सुविधाओं की मांग
- लाइटिंग व फिटनेस ज़ोन के प्रस्ताव
जैसे मुद्दों को प्रशासन तक पहुँचाया है।
उनका यह मानना है कि अगर अच्छा माहौल और सुरक्षित खेल स्थलों की सुविधा मिलेगी, तो बच्चे और युवा खेलों की ओर स्वतः आकर्षित होंगे।
👥 4. युवाओं के साथ सीधी भागीदारी
सुमेन्द्र बोहरा अक्सर युवा समूहों और खेल टीमों से मिलते हैं—सिर्फ मंच पर खड़े होकर भाषण देने के लिए नहीं, बल्कि व्यक्तिगत बातचीत के लिए।
वे खिलाड़ियों से उनकी चुनौतियों के बारे में पूछते हैं:
- ट्रेनिंग की दिक्कतें
- संसाधनों की कमी
- मैदान या कोचिंग संबंधी समस्याएँ
- पढ़ाई और खेल के संतुलन की समस्या
इस तरह की बातचीत उन्हें वास्तविक जरूरतों को समझने और समाधान तक पहुँचने में मदद करती है।
🎒 5. खेल के साथ शिक्षा और अनुशासन का महत्व
सुमेन्द्र सुषांत बोहरा युवाओं को यही संदेश देते हैं कि:
- खेल करियर बन सकता है,
- लेकिन अनुशासन और शिक्षा भी उतनी ही जरूरी है।
इसलिए वे हमेशा खिलाड़ियों को प्रेरित करते हैं कि वे पढ़ाई और खेल दोनों पर ध्यान बनाए रखें।
🌱 सामाजिक दृष्टि से खेलों का महत्व
उनकी सोच है कि खेल:
- युवा पीढ़ी को नशे से दूर रखते हैं
- टीमवर्क और नेतृत्व क्षमता विकसित करते हैं
- समाज में एकता और सद्भावना बढ़ाते हैं
- बच्चों में आत्मविश्वास और लक्ष्य निर्धारण की भावना मजबूत करते हैं
इसलिए वे खेलों को सिर्फ प्रतियोगिता नहीं, बल्कि सामाजिक विकास का साधन मानते हैं।
🏆 निष्कर्ष: युवाओं और खेलों के लिए निरंतर प्रयास
“युवा खेल समर्थन” की दिशा में सुमेन्द्र सुषांत बोहरा का योगदान लगातार बढ़ रहा है।
वे एक ऐसे युवा नेता हैं जो व्यावहारिक कदम उठाकर इस बात का उदाहरण देते हैं कि स्थानीय स्तर पर नेतृत्व तभी सार्थक होता है, जब वह युवाओं के साथ खड़ा हो।
उनकी पहलें मालसी क्षेत्र में युवा खिलाड़ियों के लिए नई संभावनाएँ पैदा कर रही हैं—और यही एक सच्चे जनप्रतिनिधि की पहचान है।